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Showing posts from May, 2020

Who Was Chanakya? चाणक्य कौन थे ?

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चाणक्य  को भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। अगर हम उन के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते है तो हमे बहुत कुछ प्राप्त हो सकता है। भारतीय समाज में उन्हें बहुत ऊंचा स्थान प्राप्त है। उनके जीवन के अनेक बाते हमारे मन में प्रेरणा का स्त्रोत भर्ती है। आचार्य चाणक्य एक महान राजनीतिज्ञ,समाजशास्त्री,दार्शनिक एवं कूटनीति में निपुर्ण थे।वे एक निर्धन व्यक्ति के घर में पैदा होते हुए भी एक शक्ति शाली साम्राज्य के प्रधान मंत्री बने ऐसे महान पुरुष के जीवन के बारे में आज में आप सभी लोगो बताना चाहता हूं। चाणक्य चाणक्य का जीवन परिचय - Biography Of Chanakya 1 ) चाणक्य का जन्म और शिक्षा आचार्य चाणक्य जी का जन्म अनुमानित 375 ई पूर्व में पाटलिपुत्र में हुआ था।उन के बचपन का नाम विष्णुगुप्त था।उन के अन्य नाम थे  कौटिल्य तथा विष्णुगुप्त   । उनके  पिता का नाम ऋषि  कनाक और माता जी का नाम चनेश्वरी देवी था। चाणक्य बचपन से ही अत्यधिक कुशाग्र बुद्धि वाले बालक थे।उनकी आरंभिक शिक्षा उनके पिता जी के मार्गदर्शन से पूरी हुई।उसके बाद उन्होंन...

Chandragupta Maurya। चन्द्रगुप्त मौर्य

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जब भी हम अपने इतिहास को झाक कर देखते है तो हमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती है। ऐसा ही एक राजवंश था जो कि ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में उत्पन हुआ था। इस राजवंश का नाम था मौर्य। इस वंश का संस्थापक  चन्द्रगुप्त मौर्य जी थे।उसने इस वंश कि स्थापना 325 ई पूर्व में कि थी। उन्होंने 325 से 298 ई पूर्व तक  शासन किया । उस के बाद उनके पुत्र बिन्दुसार जी राजगद्दी पर बैठे उन्होंने 298 से लेकर 273 ई पूर्व तक शासन किया। बिन्दुसार के बाद इस वंश का अगला शासक अशोक बना। जो कि इस वंश का ही नहीं बल्कि दुनिया के महान शासको में गिना जाता है।उन्होंने 269 से लेकर 232 ई पूर्व तक शासन किया। अशोक के बाद अनेक शासक बने परन्तु वे सभी अयोग्य प्रमाणित हुए।जिस कारण वे इस राज वंश को सत्रुओ से नहीं बचा सके। इस वंश का अंतिम शासक वृहद्रत था। इस वंश के शासकों ने पहली बार भारत को एक छत्र करने का प्रयत्न किया जिस में वे सफल भी रहे। इस महान राजवंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य के बारे में हम जानेंगे। चन्द्रगुप्त मौर्य चन्द्रगुप्त मौर्य चन्द्रगुप्त मौर्य की गण...

Lord Buddha ( महात्मा बुद्ध)

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महात्मा बुद्ध का जीवन परिचय,उनकी शिक्षाएं(Biography of lord Buddha) बौद्ध धर्म के सस्थापक महात्मा बुद्ध( Lord Buddha) थे। उनका आरम्भिक नाम सिद्धार्थ था। 29 वर्ष की आयु में वे सच्चे ज्ञान की तलाश में घर छोड़ कर सन्यासी बन गए। उन्हें 35 वर्ष की आयु में बौद्ध गया नामक स्थान पर सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई। महात्मा बुद्ध जी ने अपना पहला उपदेश सारनाथ नामक स्थान पर दिया।उन्होंने उसके बाद 45 वर्षों तक लगातार भारत देश में अपना ज्ञान लोगो तक पहुंचाया। उनकी सरल शिक्षाओं ने लोगो के में पर जादुई प्रभाव डाला जिस के कारण बड़ी संख्या में लोग उनके अनुयाई बने। उन्होंने चार तत्वों पर प्रभाव डाला जो थे महान सत्य,अष्ट मार्ग,कर्म सिद्धांत,अहिंसा तथा परस्पर भाईचारा।वे याग्यो, बालियो, वेदों , संस्कृत भाषा,तपस्या, जाति प्रथा तथा ईश्वर पर अविश्वास करते थे।वे निर्वाण को मनुष्य के जीवन का परम उद्देश्य मानते थे।महात्मा बुद्ध में अपने अनुयाइयो के संगठित कर के बौद्ध संघ की स्थापना की। इस धर्म ने भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। महात्मा बुद्ध का जीवन(life of lord Buddha) 1)जन्म तथा म...

स्वतंत्रता की परिभाषा व इसके प्रकार

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स्वतंत्रता की अवधारणा( concept of liberty)  भूमिका -आदि काल से स्वतंत्रता एक ऐसा विषय रहा है जिस के प्राप्ति के लिए मानव ने अपना सबकुछ न्योछावर करने में कभी आनाकानी नहीं की है। स्वतंत्रता मनुष्य के विकास के लिए एक परमावश्यक तत्व हैं । इस के बिना मनुष्य का आर्थिक सामाजिक तथा वायक्तिगत विकास संभव नहीं हो सकता। इसी कारण स्वतंत्रता के लिए मानव बड़ी से बड़ी कुर्बानी काटने को तैयार हो जाता है। मनुष्य को स्वतंत्रता पाने के लिए आदिम काल से ही संघर्ष करना पड़ा है। कभी वह निरंकुश शासक का,कभी समाज के रीति रिवाजो का,कभी समंत्तिय वर्ग का तो कभी विदेशी सत्ताओ का गुलाम बना रहा। परन्तु आज स्वतंत्रता प्रत्येक मनुष्य का अधिकार बन गई है। स्वतंत्रता और समानता लोकतंत्र के प्रमुख आधार है। परंतु सदैव ऐसा नहीं था इस के लिए मानव को एक बड़ी लडाई लड़नी पड़ी। तब जाकर  हमें स्वतंत्रता प्राप्त हुई। स्वतंत्रता का अर्थ तथा परिभाषा (Meaning and Definitions of Liberty) स्वतंत्रता शब्द वायक्ती के जीवन में सफूर्ती, एक नई आशा, एक नई भावना उत्पन करता है।इसी कारण इसे वयक्ती सर्वश्रेष्ठ मानता है। स्वतंत्र...

हड़प्पा की सभ्यता

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भूमिका   - हड़प्पा सभ्यता अथवा सिंधु घाटी की सभ्यता भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की सब से प्राचीन तथा विकसित सभ्यताओं में गिनी जाती है। इस सभ्यता  की खोज ने भारतीए इतिहास के एक नए युग का श्री गणेश किया। इस सभ्यता कि खोज सर्वप्रथम १९२१ में  श्री दयाराम साहनी  की ने कि थी।यह सभ्यता एक विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी। जिस का दायरा लगभग १२,९९,६०० वर्ग किलो मीटर था। सभ्यता के प्रमुख केंद्र हड़प्पा, मोहनजोदड़ो,बनवाली,कलीबंगन आलगीरपुर लोथल आदि थे।  हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना बहुत ही उच्च कोटि की थी। यह सभ्यता प्राचीन मिस्र, मेसोपोटानिया तथा चीन आदि सभ्यताओं जैसे ही नदियों के किनारे बसी हुई थी। यह सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी। यहां के लोगों का मुख्य व्यावसाय कृषि था। हड़प्पा सभ्यता के स्त्रोत (Sources Of Harappan civilization)  हड़प्पा सभ्यता के संबंध में हमारे पास कोई भी लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं है क्युकी हम लोग आज तक भी उस सभ्यता कि लिपि को नहीं पढ़ सके है। इस लिए हमारे पास उस सभ्यता का अध्यायान केवल पुरातात्विक सत्रोतो के जरिए ही किया जा सकता है,जो की इस ...