स्वतंत्रता की परिभाषा व इसके प्रकार
स्वतंत्रता की अवधारणा( concept of liberty)
भूमिका -आदि काल से स्वतंत्रता एक ऐसा विषय रहा है जिस के प्राप्ति के लिए मानव ने अपना सबकुछ न्योछावर करने में कभी आनाकानी नहीं की है। स्वतंत्रता मनुष्य के विकास के लिए एक परमावश्यक तत्व हैं । इस के बिना मनुष्य का आर्थिक सामाजिक तथा वायक्तिगत विकास संभव नहीं हो सकता। इसी कारण स्वतंत्रता के लिए मानव बड़ी से बड़ी कुर्बानी काटने को तैयार हो जाता है। मनुष्य को स्वतंत्रता पाने के लिए आदिम काल से ही संघर्ष करना पड़ा है। कभी वह निरंकुश शासक का,कभी समाज के रीति रिवाजो का,कभी समंत्तिय वर्ग का तो कभी विदेशी सत्ताओ का गुलाम बना रहा। परन्तु आज स्वतंत्रता प्रत्येक मनुष्य का अधिकार बन गई है। स्वतंत्रता और समानता लोकतंत्र के प्रमुख आधार है। परंतु सदैव ऐसा नहीं था इस के लिए मानव को एक बड़ी लडाई लड़नी पड़ी। तब जाकर हमें स्वतंत्रता प्राप्त हुई।
स्वतंत्रता का अर्थ तथा परिभाषा(Meaning and Definitions of Liberty)
स्वतंत्रता शब्द वायक्ती के जीवन में सफूर्ती, एक नई आशा, एक नई भावना उत्पन करता है।इसी कारण इसे वयक्ती सर्वश्रेष्ठ मानता है। स्वतंत्रता के अंग्रेजी शब्द liberty की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द liber से हुए है,जिसका अर्थ है सभी प्रकार ke' बंधनों का अभाव'। इसका अर्थ हुआ की वायक्ति के कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिएऔर उसे बिना रोक टोक के अपने कार्य करने कि छूट होनी चाहिए। परन्तु इसका ऐसा अर्थ भी नहीं हा की व्यक्तित जो मर्जी चाहे वो कार्य करे। वयक्ति एक सामाजिक प्राणी हा और समाज बिना प्रतिबंधों के बिना नहीं चल सकता। इस लिए समाज में रहते हुए स्वतंत्रता का अर्थ है अनुचित प्रतिबंधों का अभाव। सभ्य समाज की पहली शर्त यह होती है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मनमानी ना करे। जिस का दूसरों पर प्रभाव पड़ता है।स्वतंत्रता की परिभााएं-
1) हाब्स के अनुसार,"स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव है।"
2)लॉक का कहना है कि,"स्वतंत्रता कानून के अतिरिक्त अन्य बंधनों का अभाव है।"
3) हरबर्ट स्पेंसर का कहना है कि,"प्रत्येक मनुष्य वह करने के स्वतंत्र हेंजिस्की वह इच्छा करता है, यदि वह किसी अन्य मनुष्य की समान स्वतंत्रता का हनन नहीं करता।"
4) मैकेनी का कहना हैं कि,"स्वतंत्रता सभी प्रकार के प्रतिबंधों का अभाव नहीं बल्कि अनुचित के स्थान पर उचित प्रतिबंधों की स्थापना है।"
5) सीले का कहना है कि," अति शासन का उलट स्वतंत्रता है।"
6) प्रो लास्की के अनुसार,"स्वतंत्रता से अभिप्राय उस वातावरण को बनाए रखना है जिसमें वायक्तयो को अपने सर्वोच्च विकास के अवसर प्राप्त हो सके।"
1) According to Hobbs, "freedom means lack of restrictions."
2) Locke states that, "there is a lack of bonds other than the independence law."
3) Herbert Spencer states that "every human being is free to do what he or she would like to do if he or she does not violate the same freedom of another human being."
4) Mackenney states that, "Freedom is not the absence of all kinds of restrictions but the establishment of reasonable restrictions in place of the unreasonable."
5) Seele states that "the opposite of over-rule is freedom."
6) According to Prof. Laski, "Freedom means maintaining an environment in which individuals have the opportunity for their highest development."
इस प्रकार स्वतंत्रता का सही अर्थ अनुचित प्रतिबंधों का अभाव हुआ। अर्थात वायकती व सभी कार्य कर सकता हा जिस से उसका सर्वोपरि विकास हो सके।
स्वतंत्रता के विशेषताएं(features of Liberty)-
स्वतंत्रता की मुख्य विशषताएं इस प्रकार है-1) स्वतंत्रता प्रतिबंधों का अभाव - नहीं (liberty is not Absence of Restraints)- स्वतंत्रता का अर्थ नहीं हा की वयकती हो चाहे वो कर सेकओर वह अपनी मनमानी करे। स्वतंत्रता सभी प्रकार के बंधनों का आभाव नहीं है। समाज में रहने की पहली शर्त यह होती है कि वायाक्ति पर कुछ प्रतिबंध लगे हुए होते है,यदि समाज ऐसा नहीं करता है तो हर कोई अपनी मनमानी करने लगेगा जिस के कारण समाज में चारो ओर अराजकता का माहौल पैदा होगा। ऐसे में किसे भी व्यक्ति को वास्तविक स्वतंत्रता नहीं मिल सकती।
2) स्वतंत्रता उचित प्रतिबंधों का होना है (Existence of Reasonable restrictions) - स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि वायाक्ती के कार्यों पर या अधिकारों के प्रयोग पर उचित बंधनों का होना, ऐसे बंधनों का होना जो की समाज के हित में आवश्यक है, ऐसे बंधनों का होना जिनसे समाज के अन्य सदस्यों के हितों या स्वतंत्रता कि रक्षा होती है।उदहारण के लिए हमें संविधान द्वारा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता दी गई है परन्तु इसका अर्थ यह नहीं हुआ की हम समाज में लोगो को कुछ ऐसा कह से जिस का उनके मान सम्मान पर ठेस पहुंचे। अगर हम ऐसा कुछ कर देते है तो हमें दंड भी भुगतना पड़ सकता है। समाज में अगर प्रतिबंध न हो तो हर कोई मनमानी करने लगेगा जिस के कारण समाज में अशांति तथा अराजकता का माहौल उत्पन हो सकता है।अत समाज में शांति स्थापित करने के लिए उचित प्रतिबंध होने चाहिए।
3)स्वतंत्रता समाज में ही संभव है - वयकती की स्वतंत्रता समाज में ही संभव है। समाज की राजनीतिक व्यवस्था वयकति की स्वतन्त्रता को सुनिश्चित करती है,इसके लिए आवश्यक वातावरण पैदा करती है और उसके रास्ते की बाधाओं को दूर करती है।मानव केवल एक व्यवस्थित समाज में ही अपने जीवन का विकास कर सकता है।
4)स्वतंत्रता समान रूप से सब के लिए उपलब्ध होती है - स्वतंत्रता का यह भी गुण है कि यह समाज में सभी लोगो को समान रूप से उपल्ध होती है। यदि समाज में केवल कुछ ही लोगो को स्वतंत्रता प्राप्त होती है और दूसरो को स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती। तो इसे स्वतंत्रता नहीं कहा जा सकता है,बल्कि इसे विशेषाधिकार कहा जाता है और विशेषाधिकार स्वतंत्रता का शत्रु है।
स्वतंत्रता के दो स्वरूप
1)सकारात्मक स्वतंत्रता।2)नकारात्मक स्वतंत्रता।
स्वतंत्रता के दो पक्ष है - नकारात्मक स्वतंत्रता व सकारात्मक स्वतंत्रता।
1)नकारात्मक स्वतंत्रता- स्वतंत्रता के नकारात्मक पक्ष से हमारा अभिप्राय यह है कि वयक्ती को अधिक से अधिक स्वतंत्रता प्राप्त हो। नकारात्मक स्वतंत्रता के समर्थक यह मानते है कि व्यक्ति को जितनी अधिक स्वतंत्रता प्राप्त होगी वह उतनी ही तेजी से अपना विकास करेगा। वे यह भी मानते है कि व्यक्ति के अंदर विवेक होता है तथा वह अपनी स्वतंत्रता के लिए किसी दूसरे की स्वतंत्रता का हनन नहीं करेगा।नकारात्मक स्वतंत्रता के समर्थक लोगो के विकास के लिए राज्य तथा समाज को आवश्यक मानते है ।उन का कहना है कि अगर समाज नहीं होगा तो इससे चारो ओर अराजकता फैल सकती है। परन्तु वे राज्य को एक आवश्यक बुराई मानते है। उन का कहना है कि मानव पर जितने अधिक कानून होंगे उसकी स्वतंत्रता उतनी अधिक काम होती जाएगी।
नकारात्मक स्वतंत्रता के प्रमुख समर्थक राजनीतिज्ञ इस प्रकार है - लॉक,एडम स्मिथ, रिकॉर्डों,हरबर्ट स्पेंसर,जान स्टुअर्ट मिल,मैकाले आदि।
2) सकारात्मक स्वतंत्रता - स्वतंत्रता के सकारात्मक पक्ष से हमारा अभिप्राय है की व्यक्तियो पर राज्य जहां जरूरत समझे वहा उस पर पाबन्दी लगा दी जाए। इससे समरा अभिप्राय यह है कि जहां पर जरूरत हो राज्य को व्यक्ति के कार्यों पर रोक लगनी चाहिए। अगर राज्य व्यक्ति को स्वतंत्र छोड़ दे तो इसके परिणाम भी हो सकते है। इसके कारण शक्तिशाली लोग कमजोर तथा गरीब जनता का शोषण कर सकती है। और समाज में अराजकता भी फैल सकती है। इसके कुप्रभाव हमें इतिहास में देखने को मिले है। सकारात्मक स्वतंत्रता के समर्थको ने राज्य को एक बुराई नहीं बल्कि एक आवश्यक सच्चाई बताया है। उनका मानना है कि राज्य का व्यक्ति पर हस्तक्षेप होना चाहिए। सकारात्मक स्वतंत्रता के प्रमुख समर्थक है कांट,ग्रीन,हाब हाऊस,लास्की मैंकाइवर,बार्कर,जान स्टुअर्ट मिल आदि


Comments
Post a Comment