हड़प्पा सभ्यता का इतिहास


भूमिका  - हड़प्पा सभ्यता अथवा सिंधु घाटी की सभ्यता भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की सब से प्राचीन तथा विकसित सभ्यताओं में गिनी जाती है। इस सभ्यता  की खोज ने भारतीए इतिहास के एक नए युग का श्री गणेश किया। इस सभ्यता कि खोज सर्वप्रथम १९२१ में श्री दयाराम साहनी की ने कि थी।यह सभ्यता एक विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी। जिस का दायरा लगभग १२,९९,६०० वर्ग किलो मीटर था। सभ्यता के प्रमुख केंद्र हड़प्पा, मोहनजोदड़ो,बनवाली,कलीबंगन आलगीरपुर लोथल आदि थे।  हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना बहुत ही उच्च कोटि की थी। यह सभ्यता प्राचीन मिस्र, मेसोपोटानिया तथा चीन आदि सभ्यताओं जैसे ही नदियों के किनारे बसी हुई थी। यह सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी। यहां के लोगों का मुख्य व्यावसाय कृषि था।
हड़प्पा सभ्यता के स्त्रोत
(Sources Of Harappan civilization) 

हड़प्पा सभ्यता के संबंध में हमारे पास कोई भी लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं है क्युकी हम लोग आज तक भी उस सभ्यता कि लिपि को नहीं पढ़ सके है। इस लिए हमारे पास उस सभ्यता का अध्यायान केवल पुरातात्विक सत्रोतो के जरिए ही किया जा सकता है,जो की इस प्रकार से है-



1) प्राचीन नगर और इमारत (  old towns and buildings)-हड़प्पा सभ्यता को जानने का हमारा सब से महत्व पूर्ण। स्रोत प्राचीन भवनो ,गलियों,बाजारों, सनानागरो आदि से प्राप्त हुए अवशेष है।ये अवशेष इस सभ्यता के जानने में महत्वपूर्ण भमिका निभाते है जिससे हमें काफी अधिक जानकारी प्राप्त होती हैं।


2) खिलौने एवं मूर्तिया( Toys and Sculptures ) - किसी भी इतिहास को जानने के लिए उस समय के लोगो की कला और संस्कृति के संदर्भ में जानना बहुत महत्वपूर्ण समझा जाता है। हड़प्पा सभ्यता से संबंधित  हमारे पास काफी सारे कला और संस्कृति से संबंधित स्रोत उपलब्ध है जैसे कि मिट्टी के खिलौने,धातु से बनी हुई मूर्तिया आदि। इसके साथ साथ हमें उस काल की चित्रकारी भी प्राप्त हुई हैं जो कि यह दर्शाता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग केवल उपयोगिता को ही नहीं बल्कि सुंदरता को भी महत्व देते थे।



3) मुहरे(Seals) - मुहरो के दुआरा हमें हड़प्पा संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर काफी जानकारी प्राप्त होती है।इनके दुआर हमें हड़प्पा सभ्यता के लोगो के धर्म,पशु- पक्षि और पेड़- पोधो तथा उनकी लिपि से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है।परन्तु हम आज तक भी उनकी लिपि को नहीं पढ़ सक है।
4)शवाधान( Burials) -hadappa सभ्यता के लोग मृतकों को दफनाया करते थे। उन्हें गर्तो में दफनाया जाता होगा। कुछ कब्रो से पुरातत्वविभाग के लोगो को आभूषण भी प्राप्त हुए हैं।

खोज उत्पत्ति एवं विकास
( Discovery,origin and evolution)
हड़प्पा सभ्यता की खोज की कहानी काफी मनोरंजक है। 20 वी शताब्दी तक अंग्रेज यही मानते थे कि भारत को सब से पहले आर्यो ने ही बसाया है। लेकिन जब सन1921 में आर बी दयाराम साहनी ने हड़प्पा नगर कि खोज की तो अंग्रेजो का अनुमान गलत साबित हुआ। इस खोज ने यह प्रमाणित कर दिया कि आर्यो से पहले भारत में एक उच्च कोटि कि नगरीय सभ्यता मौजूद थी। इसके बाद आस पास के इलाकों में खुदाई की गई और सन1922 में पुरातत्व विभाग के एक अधिकारी श्री आर डी बनर्जी ने मोहन- जो - दड़ो नामक नगर की खोज की।इस नगर में भी उन्हें हड़ाप्पा जैसे ही अनेक समान चीजे प्राप्त हुई।इस लिए इसे भी इस सभ्यता का एक भाग माना गया।इस के बाद पुरातत्व विभागके अध्यक्ष Dr Marshal  or उसके बाद के अध्यक्ष sir Mortimer Wheeler ने इन स्थलों की खुदाई का कार्य अपने हाथो में ले लिया। उन्हें वहां से अनेक चीजे प्राप्त हुई और यह अनुमान लगाया गया कि ये चीजे आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व की है।और यह भी पता चला की यहा पर कभी एक महान सभ्यता फली - फुली रही होगी।सिंधु नदी घाटी पर होने के कारण इस सभ्यता का नाम सिंधु घाटी सभ्यता पड़ा।परन्तु बाद में इस सभ्यता के अवशेष सिंधु घाटी से बाहर मिले तो इस कारण इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता पड़ा क्युकी अन्य स्थानों पर को अवशेष मिले थे वे सभी हड़प्पा से मिलते जुलते थे।
2) प्रारंभ एवं विकास( origin and Evolution) - Sindhu घाटी की सभ्यता का प्रारंभ एवं विकास कब से कब तक हुआ इस बरो में बहुत से विद्वानों में मतभेद है ।इस बारे में विभीन विभीन विद्वानों ने अपने अपने तर्क दिए है। एच हेरास ने इस सभ्यता का काल 5600 ई पूर्व माना है।sir John marshal के अनुसार इस सभ्यता का काल 4000-2500 ई पूर्व माना है। सी एस फबरी ने इस सभ्यता का काल 2800- 2500 ई पूर्व माना है।परन्तु अधिकांश इतिहासकार सिंधु घाटी की सभ्यता का काल 2250-1750 ई पूर्व मानते है।


भौगोलिक विस्तार एवं मुख्य केंद्र
Geographical extent and main centres

1) भौगोलिक विस्तार- हड़प्पा सभ्यता एक विस्तृत क्षेत्र में फली हुए थी। इसका आकार त्रिभजकार था। यह सभ्यता उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में नर्मदा नदी तक फैली हुई थी। और पश्चिम में बलूचिस्तान से लेकर उत्तर पूर्व में मेरठ तक फैली हुई थी। इस सभ्यता का क्षेत्र लगभग 12,99,600वर्ग किलमीटर माना गया है।यह सभ्यता अपनी समकालीन सभ्यताओं से कहीं अधिक बड़ी थी।
2)सभ्यता के प्रमुख केन्द्र - सिंधु घाटी सभ्यता के अनेकों केंद्र थे। अब तक इस सभ्यता के 1000से भी अधिक साथालो की खोज की गई है।सभ्यता के प्रमुख केंद्र इस प्रकार से है-

1)हड़प्पा - हड़प्पा पश्चिम पंजाब (पाकिस्तान) के मिंटगुमरी लाहौर जिले में लाहौर से लगभग100 मील की दूरी पर स्थित है। इस नगर की खोज 1921मे श्री आर वी दयाराम साहनी जी ने कि थी। यह इस सभ्यता का सब से विशाल नगर था। ऐसा माना जाता है कि सिंधु घाटी सभ्यता की राजधानी हड़प्पा रही होगी। यह नगर  रावी नदी के किनारे बसा हुआ था । यह नगर लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ था।

2)मोहनजोदड़ो - मोहनजोदड़ो हदाप्पा सभ्यता का दूसरा बड़ा तथा महत्वपूर्ण नगर था। इस नगर की खोज 1922 में आर डी बनर्जी जी ने कि थी।यह शहर वर्तमान समय में पाकिस्तान के लरकान जिले में स्थित है जो कि सिंधु नदी के किनारे बसा हुआ है।यह हड़प्पा नगर से लगभग 483किलोमीटर दूरी पर स्थित है।यह नगर 4 किलोमीटर के गहरे में फैला हुआ है। यहां के मकान योजना बद तरीके से बने हुए थे। यहां का जल निकासी कार्य काफी उनत था। यहां की सड़कें लंबी तथा चोड़ी थी। इस नगर को 'मृतकों के टीले'के नाम से भी जाना जाता है।इस नगर से हमें कांसे की नर्तकी की मूर्ति प्राप्त हुई है। यह नगर अपने बड़े - बड़े सानानगरो, विशाल भवनों और विशाल हाल के लिए जाना जाता था।
3)चन्हूदड़ो - यह नगर पाकिस्तान के सिंध में मोहनजोदड़ो से लगभग 130किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस नगर की खोज सन1931 ई में एन जी मजूमदार जी ने कि थी।  यह नगर मनके बनाने के लिए मशहूर था। इस नगर की भवन निर्माण कला हड़प्पा से मिलती जुलती थी।
4) सुत्कागेंडोर- यह नगर पाकिस्तान के (बलूचिस्तान)प्रांत में अरब सागर के किनारे पर स्थित है । इस नगर की खोज भी 1931 ई में ही हुई थी।और इस नगर की खोज सर ओरल सटाइन में कि थी।यह हड़प्पा सभ्यता का एक प्रमुख बंदरगाह था।
5)संधोल - यह नगर भारत वर्ष के लुधियाना जिले में स्थित है। इस नगर की खोज 1968 में एस एम तलवार और आर एस विष्ट जी ने कि थी। यह नगर बर्तन,मूर्तिया आदि चीजे बनाने के लिए प्रसिद्ध था।
6)बनवाली - यह नगर भारत में हरियाणा राज्य के हिसार जिले में स्थित है। इस नगर कि खोज सन 1973 ई में आर एस विष्ट जी ने कि थी। इस नगर से प्राप्त समान हड़प्पा से मिलते जुलते थे।
7) लोथल-  यह नगर गुजरात (भारत)के अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट पर स्थित था। यह एक विशाल नगर था जो कि लगभग 3 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ था। यह नगर एक विशाल बंदरगाह था जो कि हड़प्पा सभ्यता के व्यापार का प्रमुख केन्द्र था। इस शहर मनके बनाने का भी काम करता था। इस नगर की खोज 1954 में एस आर राव जी ने कि थी।
हड़प्पा सभ्यता के अन्य केंद्र है धोलाविरा,कलिबंगन,रंगपुर,आलमगीरपुर,बनवाली और मिताथल आदि थे।

हड़प्पा कालीन समाज
हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त हुए अवशेषों को अगर हम देखे तो हम यह अनुमान लगा सकत है कि उस काल में उनका समाज कितना उन्नत रहा होगा। हड़प्पा कालीन लोगो के समाज की कुछ काल्पनिक विशेस्ताए इस प्रकार से है-
1)परिवार - हड़प्पा सभ्यता के लोगो के एक प्रमुख इकाई परिवार थी। उस समय परिवार संयुक्त रहते होगे। क्युकी उस काल में बड़े बड़े भवन बनाए जाते थे। प्रत्येक परिवार में mata- पिता,दादा- दादी,चाचा - चाची ,भाई- बहन आदि मिलजुल कर रहते थे।
2)सामाजिक विभाजन -हड़प्पा सभ्यता में समाज को करने वर्गो में विभाजित किया हुआ था इस के बारे में सही जानकी उपलब्ध नहीं है, परन्तु ऐसा माना जाता है किया समय समाज को 4 भागो में विभाजित किया गया था।जिन में शासक वर्ग,धनी वर्ग, मध्यम तथा निम्न वर्ग शामिल थे। शासक तथा धनी वर्ग आनंद भरा जीवन व्यतीत करते थे। वे विशाल भवनों में रहा करते थे।जबकि दूसरी ओर मध्यम वर्ग थोड़े छोटे मकानों में रहा करते थे । समाज में निम्न वर्ग के लोग झोपडियों में रहा करते थे ।उन की स्थिति संतोषजनक नहीं थी।
3) भोजन - सिंधु सभ्यता के लोग विभीन प्रकार के भोजन खाने के शौकीन थे। वे शाकाहारी था मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन खाने के शौकीन थे। उनका मुख्य भोजन गेहूं, चावल तथा मक्की था। इसके अतिरिकत वे विभीन प्रकार कि दालो दूध,दही,माखन, घी तथा मसालों का भी प्रयोग करते थे। वे भेड ,बकरी , गाय,सूअर,हिरण,मुर्गे तथा मछली आदि का मास भी खाते थे।
4)वस्त्र - सिंधु घाटी सभ्यता के लोग किस प्रकार के वस्त्र पहनते थे इस बात का पता हमें खुदाई से प्राप्त हुई मूर्तियो से पता लगती है। उस काल में सूती, ऊनी और रेशमी वस्त्र पहनते थे। उस समय सत्रियो तथा पुरुषों के वस्त्र एक जैसे ही होते थे। खुदाई से प्राप्त हुई सिलाइयो से यह अनुमान लगाया का सकता है कि वे लोग सिलना तथा वस्त्रों में कड़ाई करना जानते थे।
5)आभूषण -sidhu घाटी सभ्यता के लोग आभूषणों के काफी शौकीन थे ।चाहे पुरुष हो सत्रिया दोनों ही आभूषण पहनने के काफी शौकीन थे। उच्च वर्ग के लोग सोने चांदी हाथीदांत से बने हुए आभूषण पहनते थे।जबकि गरीब लोग हड्डियों,सिपो और घोघो से बने हुए आभूषण पहनते थे।

हड़प्पा कालीन अर्थव्यवस्था
सिंधु घाटी की खुदाई से हमें उस काल की अर्थव्यवस्था पर काफी प्रकाश मिला है। सिंधु घाटी के लोगो के मुख्य व्यवसाय इस प्रकार से है-


1) कृषि - सिंधु प्रदेश में जल की अधिकता थी। इस कारण से यहा की भूमि उपजाऊ थी। सिंधु लोगो का प्रमुख व्यावसाय कृषि था। सिंधु लोग गेहूं चावल,कपास मटर,रैताथा तिल आदि अनाज लगते थे। इस के अलावा वे विभींन प्रकार के फलों को भी लगते थे जैसे खजूर,नारियल,तरबूज ,केला तथा अनार प्रमुख थे। उस समय अनाज को पथरो की चकियो के द्वारा पिसा जाता था।
2)पशुपालन - सिंधु घाटी के लोगो का दूसरा मुख्य व्यावसाय पशु पालन था। इन पशुओं का प्रयोग से लोग दूध, मांस तथा समान  ढोने के लिए करते थे।वे लोग भेड़, बकरी, गाय, भेंस सूअर कुत्ते,हाथी आदि अनेक जनवरी को पालते थे। वे शेर बाघ, गंडे आदि जानवरों को भी जानते थे। उन्हें घोड़े की जानकारी नहीं थी।
3)अन्य व्यावसाय - कृषि एवं पशुपालन के अतिरिक्त वे लोग व्यापार था अनेक उद्योग भी चलते थे। वे लोग कपास से कपड़े बनाते थे तथा उन्हें सिलते तथा उन की कढ़ाई करते थे।इस के अतिरिक्त उन लोगो ने अनेक सभ्यताओं के साथ व्यापारिक संबंध भी सठापित किए हुए थे। हड़प्पा सभ्यता के लोगो का व्यापार मिस्र, मेसोपोटामिया ,ईरान,सीरिया तथा अफगानिस्तान के साथ होता था।इन देशों को सिंधु घाटी के लोग सूती कपड़ा, आभूषण हाथीदांत आदि चीजे निर्यात करते थे।वे लोग विदेशी से सोना चांदी,श्रृंगार की वस्तुएं आयात करते थे।
धर्म -
हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त वस्तुओं से यह ज्ञात होता है कि सिंधु लोग मूर्ति पूजा में विश्वास रखते थे।परन्तु इस बारे में अनेक विद्वानों में मतभेद है। क्युकी हड़प्पा सभ्यता की खुदाई से हमें कोई भी मंदिर प्राप्त नहीं हुआ है और दूसरा की हम आज तक भी इस सभ्यता की लिपि को नहीं समझ सके है। परन्तु वासा भेे नहीं कहा जा सकता की हड़प्पा निवासी किसी भी धार्मिक संस्कारों को नहीं मानते थे। इतिहासकारों को अनेक ऐसे प्रमाण मिले है जिस से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि हड़प्पा निवासी इश्वर पर विश्वास करते थे। हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख देवी एस प्रकार से है-


1) मातृदेवि की पूजा - हड़प्पा सभ्यता के लोग सब से ज्यादा मातृ देवी की पूजा किया करते थे।क्युकी इस का प्रमाण हमें सिंधु घाटी की खुदाई के दौरान हमें मातृ देवी कि अनेक मूर्तिया, मुहरें तथा तावीज मिले है। ऐसा माना जाता है कि उस समय के लोग माता की पूजा धूप और दीप आदि जला कर किया करते थे। माता को खुश करने के लिए बली भए चढ़ाई जाती थी।
2)शिव की पूजा - हड़प्पा सभ्यता के लोग भगवान शिव की पूजा भी किया करते थे। हम अनेक ऐसी मुहरें प्राप्त हुए हा जिस पर इस देवता का चित्र अंकित किया गया है। इस में इस देवता को योगी की मुद्रा में बताया गया है और इस के चारो ओर अनेक पशु पक्षी दिखाए गए है और साथ ही इसमें इस देवता के तीन मुख भी दिखाए गए है। ऐसा देवता केवल और केवल भगवान शिव ही है क्युकी उन्हें है एक योगी,पशुपतिनाथ और त्रिमुखी बताया गया है।
3)अन्य देवी देवता - मातृ देवी और भगवान शिव के अतिरिक्त भी सिंधु घाटी के लोग अन्य अनेक देवी देवताओं की पूजा किया करते थे। इन में से प्रमुख है पशुओं की पूजा,वृक्षों की पूजा,जल पूजा ,सूर्य की पूजा और लिंग तथा योनि की पूजा।

महान सिंधु सभ्यता का पतन
यह बात आज तक भी एक आश्चय का विषय बना हुआ है कि इतनी विशाल तथा उन्नत सभ्यता का अंत कैसे हुआ। ऐसा किस कारण हुआ इस पर आज भी अनेक विद्वानों में मतभेद बना हुआ है। हड़प्पा सभ्यता के अंत का कोई एक कारण उत्तर दाई नहीं रहा होगा अपितु इस के पीछे अनेक कारण रहे होंगे। इस सभ्यता का पतन लगभग 1700 ई पूर्व में शुरू होने लगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस विस्तृत सभ्यता का अंत एकदम नहीं हुआ होगा अपितु धीरे धीरे हुआ होगा।इनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-


1) आर्यो का आक्रमण(Aryan Invasion)- अधिकांश विद्वानों का मानना है कि हड़प्पा सभ्यता का पतन आर्यो या अन्य किसी विदेशी शक्ति के बार बार आक्रमण करने से हुआ। इस का समर्थन गार्डन चाइल्ड , सर मोर्टिमर व्हीलर आदि इतिहासकारों ने कि है।ऋग्वेद में इस बात का प्रमाण मिले है की आर्यो को भारत में दस्यु नामक जाती के साथ युद्ध करना पड़ा था। इतिहासकार मानते है कि ये लोग कोई और नहीं बल्कि हड़प्पा सभ्यता के लोग थे।इसके अतिरिक्त हमें मोहनजोदड़ो में 38 मानव के अस्थिपंजार मिले है जिन के शरीर में किसे तेज धार वाले हथियार के निशान मिले है।
संभवतः इन पर किसे ने आक्रमण किया होगा।
परन्तु अनेक विद्वान इस विचार से सहमत नहीं है क्युकी उनका मानना है कि हड़प्पा सभ्यता बहुत विशाल थी तथा इस कों पूरी तरह एस नष्ट निही किया जा सकता था।उनका यह भी मानना है ही केवल 38 अस्तिपजर से किसे बड़े युद्ध की कल्पना नहीं की जा सकती है।
2) बाढ़- दूसरा यह अनुमान है किइस सभ्यता का पतन सिंधु तथा उस की सहायक नदियों में आई बाढ़ के कारण हुई होगी।  क्युकी सिंधु घाटी सभ्यता के केंद्र नदियों के किनारे बसे हुए थे। भू - विज्ञानिको का यह मानना है कि मोहनजोदड़ो ,हड़प्पा, चुन्हुदरो तथा लोथल नग्रो का विनाश बाढ़ के कारण हुआ था।
3) भूकंप - कुछ विद्वानों की यह मनायता है कि इस्सभ्यता का विनाश यह आज विस्तृत पैमाने पर आए भूकंप के कारण हुआ होगा इस के कारण नदियों के मार्ग बदल गए तथा अनेक बस्तियां तबाह हो गई।
4) अग्नि - कुछ इतिहसकारों का मानना है कि इस सभ्यता का अंत भयानक अग्नि कांड के कारण हुआ होगा ।क्युकी उस काल में अधिकतर घर लकड़ी के बने हुए होते थे।इस कारण आग अधिक तेजी के साथ फैली जिससे इस सभ्यता का अंत हो गया। परन्तु हम इस विचार से सहमत नहीं है क्युकी हड़प्पा सभ्यता काफी बड़ी थी। इस कारण इससे सारी की सारी सभ्यता का अंत नहीं हो सकता था। हो सकता है कि इस के कारण कोई एक नगर नष्ट हुआ हो।
5) जलवायु परिवर्तन - कुछ विद्वान मानते है कि इस सभ्यता का अंत जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ होगा। इस कारण यह के लोग पलायन करने पर मजबूर हुए होंगे। प्रारम्भ में इस क्षेक में प्रयाप्त मात्रा में बारिश होती थी और यह पर बहुत सारे पेड़ थे। परन्तु धीरे धीरे अत्यधिक पेड़ो के कटान के कारण यह सूखा पड़ने लगा जिस के कारण यहां पर खेती करना असम्भव हो गया। और धीरे धीरे भुखमरी के कारण उन लोगो को यहां से पलायन करना पड़।


6)महामारी - कुछ इतिहासकार मानते है कि इस सभ्यता के अंत का कारण कोई भयानक महामारी के कारण हुआ होगा। जिस के कारण शहर के शहर खाली हो गए। भारी संख्या में लोग मारे गए। और लोगो को अपनी जान बचने के लिए दूसरे स्थानों में जाना पड़ा।
हड़प्पा सभ्यता का पतन अपने आप में एक पहेली है।परन्तु यह निश्चित है कि इस सभ्यता का पतन इन में से किसी एक कारण से हुआ होगा।

हड़प्पा सभ्यता की देन
1)हड़प्पा सभ्यता से हमने योजनाबद्ध तरीको से नगरो को बनाना सिखा।भवनों में ईट्टो का प्रयोग हवादार महल दो या दो मंजिला भवन का निर्माण हमने इस सभ्यता से सीखा।
2) हड़प्पा सभ्यता का नगर प्रबंध भी बहुत उत्तम था। इस से हमने सड़कें तथा नालियों को बनाना सिखा।
3)हड़प्पा सभ्यता के लोगो से हमने वायापार करना सीखा।
4) हड़प्पा सभ्यता के लोग कला तथा संस्कृति को विशेष महत्व देते थे। इन से हमें भी कला तथा संस्कृति का महत्व पता चला।
5) इस सभ्यता के लोग सफाई को बहुत महत्व देते थे। हमने भी इस सभ्यता के लोगो से सफाई के बारे में सीखा। इस सभ्यता का जल निकास व्यवस्था काफी उत्तम थी।
6)इस सभ्यता के लोग सूती तथा ऊनी कपड़े आज से 5000वर्ष पूर्व पहनते थे। वे लोग कपास कि खेती करते थे। और कपास का आविष्कार विश्व में सब से पहले हड़प्पा सभ्यता के लोगो ने किया।
7) इस सभ्यता से हम ने मूर्तिया,खिलौने ,बर्तन, मूहरे आदि बनानी सीखी।
8)इस सभ्यता से हमारे जीवन में धार्मिक विश्वास पैदा हुए।
9) इस सभ्यता से हमने आटा पीसने की चक्की बनाने का तरीका सीखा।

हड़प्पा सभ्यता से सीख
हड़प्पा सभ्यता एक ऐसी महान सभ्यता थी जिस पर आज भए हम भारतीय बड़ा गर्व अनुभव करते है। इस सभ्यता से हमें बहुत सारी चीजे सीखने को मिली। परन्तु इस सभ्यता से हमें सीख लेने की भी जरूरत है। इस सभ्यता का पतन ऐसे नहीं हो सकता है। इस के पतन के पीछे कहीं न कहीं मानव खुद ही जिम्मेवार था। मानव ने इस क्षेत्र में प्रकृति के साथ छेड़खानी कि और उसका उसे परिणाम भी भुगतना पड़ा। इस लिए हमें प्रकृति के नियमों के साथ छेड़खानी नहीं करनी चाहिए। नहीं तो हमारा भी इस सभ्यता कि तरह एक दिन अंत होगा।

I hope आप हो हड़प्पा सभ्यता का इतिहास जरूर पसंद आया होगा।






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