What is state and it's elements in hindi

 Stateको राजनीति के क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह शब्द लैटिन भाषा के शब्द स्टेटस से लिए गया हा जिस का अर्थ है व्यक्ति का सामाजिक स्तर Garner के अनुसार,"  राजनीति शास्त्र का आरंभ और अंत राज्य से ही होता है।"  समाज में शांति एवं व्यवस्था राज्य  से ही संभव है। परन्तु आज। भी बहुत सारे लोगो को राज्य का सही अर्थ पता नहीं है। साधारण लोग सरकार और राज्य में कोई अंतर नहीं समझते है।कई बार एक संघके लिए भी राज्य शब्द का प्रयोग किया जाता है,और इस की इकाइयों के लिए भी राज्य संघ का प्रयोग किया जाता है।हम अपने ही देश का उदाहरण ले सकते है,जहा भारत को एक राज्य कहा जाता है।वहीं इसकी इकाइयों को भी जैसे - पंजाब ,हरियाणा,केरल, मध्यप्रदेश आदि को भी राज्य कहा जाता है। जो कि राजनीति के क्षेत्र में गलत माना जाता है। इसी लिए  राज्य शब्द का सही अर्थ जानना अत्यंत जरूरी है ।

राज्य का अर्थ और परिभाषा
(meaning and defination of state)

राज्य शब्द को अंग्रेजी में स्टेट(state) कहा जाता है।स्टेट शब्द लैटिन भाषा के शब्द स्टेटस से निकला है जिस का अर्थ  है व्यक्ति का सामाजिक स्तर। प्राचीन समय में समाज और स्टेट में अंतर नहीं समझा जाता था,परन्तु धीरे धीरे इस का अर्थ बदलता गया । आधुनिक युग में सबसेपहले राज्य शब्द का प्रयोग  machiavelli ने किया।राज्य शब्द की मुख्य परिभाषाएं इस प्रकार से है-
१) अरस्तू के अनुसार,"राज्य परिवाराें तथा ग्रामों का एक संघ होता है जिसके उड़ेश्य एक पूर्ण तथा आत्म- निर्भर जीवन की सथापना है जिससे हमारा अभिप्राय सुखी और आदरपूर्ण जीवन है।"

२) सिसरो के मतानुसार,"राज्य ऐसा बहुसंख्यक समुदाय है जो अधिकरोकी समान भावना ऑर्लभ उठाने में आपसी सहयोग करता है।"
३) प्रो० लास्की के मतानुसार,"राज्य एक प्रादेशिक समाज है,जो सरकार तथा प्रजा में विभक्त होता है और अपने नियम भौगोलिक क्षेत्र में सभी संसथाओ पर सर्वोच्च सत्ता रखता है।"

राज्य के तत्व
(Elements of state)-
राज्य को मुख्य रूप से चार भागो अथवा   तत्वों में बांटा गया है। इन में से अगर कोई भी एक तत्व ना हो तो राज्य की कल्पना भे नहीं की जा  सकती है। राज्य के चार तत्व निम्नलिखित है-
१) जनसंख्या ( population)।
२)निश्चित भूमि( fixed territory)-
३) सरकार( government)-
४) प्रभूसत्ता(sovereignty)-

१) जनसंख्या ( population)-राज्य का प्रमुख तत्व जनसंख्या है। राज्य का निर्माण पशु- पक्षियों के समूहों से नहीं हो सकता है,क्युकी राज्य एक राजनीतिक संस्था है।बिना जनसंख्या के राज्य की स्थापना तो दूर बल्कि कल्पना भी नहीं की जा सकती है।जिस प्रकार बिना पति- पत्नी के परिवार,मिट्टी के बने घड़ा और सूत के बिना कपड़ा नहीं बन सकता ,उसी प्रकार बिना मनुष्यो के समूहों के बिना राज्य नहीं बन सकता है।राज्य में कितनी जनसंख्या होनी चाहिए इस बारे में अनेक राजनीतिज्ञों ने अलग अलग विचार दिए हैं। प्लेटो के अनुसार एक आदर्श राज्य की जनसंख्या 5,040 होनी चाहिए।अरस्तू के अनुसार एक आदर्श राज्य की जनसंख्या ना तो इतनी कम होनी चाहिए कि वह अपनी रक्षा ना कर पाए। ना ही इतनी अधिक होनी चाहिए कि वह राज्य ठीक ढंग से अपना निर्वाह ना कर पाए। रूसो प्रत्यक्ष लोकतंत्र का समर्थक था।इस लिए उस ने छोटे राज्यो का समर्थन किया। उस के अनुसार एक आदर्श राज्य की जनसंख्या  १०,०००होनी चाहिए।
परन्तु आधुनिक राज्यो की जनसंख्या निश्चित नहीं की  जा सकती है।एक तरफ ऐसे कई राज्य है जिन कि जनसंख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।  जैसे चीन,भारत,अमरीका,रूस आदि।इन राज्यो की जनसंख्या कई करोड़ों में है।वहीं दूसरी तरफ वेटिकन सिटी सेनमरिनो,मोकानो आदि की जनसंख्या कुछ हजारों में ही है। किसी देश में अधिक जनसंख्या आज के समय में एक भारी समस्या बनी है।जैसे कि भारत, चीन आदि। इन देशों में लोगों को कम बच्चे पैदा करने को कहा जाता है ताकि देश की जनसंख्या नियंत्रण में रहे। वहीं दूसरी ओर कच्छ देश ऐसे भी हैं जहा पर सरकार द्वारा अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने पर पुरस्कार दिए जाते है।
अंत में हम यह कह सकते है कि जनसंख्या राज्य के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। हम इस की जनसंख्या को निश्चित नहीं कर सकते है। हम यह कह सकते है कि एक आदर्श राज्य की जनसंख्या  न हो इतनी अधिक होनी चाहिए कि वह राज्य ढंग से अपनी प्रजा का पोषण न कर पाए ओर ना ही इतनी कम होनी चाहिए कि वह अपनी रक्षा न कर सके।

२) निश्चित भूमि(fixed territory)- निश्चित भूमि राज्य का एक अनिवार्य तत्व है।जिस प्रकार जनसंख्या हमारे शरीर की आत्मा है ठीक उसी निश्चित भूमि राज्य का शरीर है। परन्तु कई राजनीतिज्ञो ने निश्चित भूमि को राज्य का आवश्यक तत्व नहीं माना है। ऐसी विचार धारा वाले लेखकों में Willoughby तथा Duguit आदि शामिल है।परन्तु आधुनिक लेखक इस विचार को मानने को तैयार नहीं हैं।उनके अनुसार निश्चित भूमि  भी राज्य का एक आवश्यक तत्व है।ऐसा कहा जाता है कि कोई भी जन समुदाय तब तक राज्य नहीं बन सकता जब तक उस समुदाय की पास अपनी कोई निश्चित भूमि ना हो। सन 1948 से पहले यहूदी लोग सारे संसार में फैले हुए थे उन के पास अपनी कोई भी  भूमि नहीं थी,इस लिए उन का अपना कोई भी राज्य नहीं था। जब वे लोग इजरायल में रहने लगे तब विश्व में वह एक राज्य बना।
राज्य की भू - सीमा का अर्थ - जब हम यह कहते हैं कि राज्य के लिए भूमि आवश्यक है  तब उस  का मतलब यह नहीं कि इस में केवल थल को ही शामिल किया जाए बल्कि इस से अभिप्राय यह है कि इसमें स्थल ,जल ,वायु  से भी होता है। उदहारण के लिए आप किसे अन्य राज्य के वायु मंडल में बिना permition हवाई जहाज नहीं उड़ा सकते है।
राज्य की भू - सीमा- जैसे कि हम सभी लोग जानते है की जिस प्रकार राज्य में जनसंख्या को निश्चित नहीं किया जा सकता ठीक उसी प्रकार राज्य के लिए कितनी बुमी निश्चित होनी चाहिए यह बताना भी मुश्किल है।भूमि की सीमा को निश्चित नहीं किया जा सकता है ।प्राचीन काल में छोटे छोटे राज्य हुए करते थे ,परन्तु वर्तमान समय में अनेक बड़े बड़े राज्य है जैसे की - रूस, अमरीका ,कनाडा,चीन इत्यादि।

३) सरकार(government)- सरकार को भी राज्य का एक अनिवार्य तत्व माना जाता है। जनसंख्या ओर निश्चित भूमि के बाद राज्य की स्थापना के लिए सरकार का होना आवश्यक हैं। किसी निश्चित भू - भाग पर बसा हुआ मनुष्यो का समूह ट्यूब तक राज्य नहीं बं सकता जब तक वह राजनीतिक दृष्टि से संगठित न हो।सरकार एक ऐसी संस्था है जो कि राज्य की इच्छा को प्रकट करती है तथा उस को कार्यान्वित भी करती है। सरकार के बिना जन समूह संगठित नहीं हो सकता है।इसके बिना जनता में अशांति रहेगी।
गार्नर (Garner) के मतानुसार," सरकार के बिना जनता एक असंघट्ठित एवं अराजक भीड़ हो जाएगी तथा विशेष सामूहिक कार्यों के लिए कोई संबंध नहीं रह जाएगा।"। अतः सुम कह सकते है कि राज्य एक अमूर्त संस्था है जिसे सरकार मूर्त रूप प्रदान करती है।
एक राज्य में सरकार का कोई भी रूप हो सकता है। किसी में लोकतंत्र को अपनाया गया है ,तो कहीं राजतंत्र ओर कहीं पर कम्युनिस्ट पार्टी को अपनाया गया है।परन्तु सरकार का कोई भी रूप क्यों ना हो प्रतेक सरकार के मुख्य तीन कार्य होते है - १) कानून बनाना।
२) कानून को लागू करना।
३) कानून की व्याख्या करना।
इन कार्यों के लिए सरकार के तीन अंग होते है विधानपलिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका।सरकार को इतना शक्तिशाली होना चाहिए कि वह अपने देश के लोगो पर नियंत्रण रखें और विदेशी आक्रमणों से अपने देश के लोगो की रक्षा कर सके।

४) प्रभुसत्ता ( sovereignty)- राज्य के लिए प्रभूसतको भी एक आवश्यक तत्व माना जाता है।इसे आगर राज्य का सबसे आवश्यक कहे तो इस में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।इस के बिना राज्य कि सठापना नहीं की जा सकती है।प्रभूसता को अंग्रेजी भाषा में ' Sovereignty' कहते हैजोकि लैटिन भाषा के शब्द Superanus से निकला है। जिसका अर्थ होता है सर्वोच्च।इस प्रकार प्रभूसत्रा का अर्थ हुआ राज्य कि सर्वोच्च शक्ति। राज्य के पास  समस्त अधिकार होते है। कोई भी उसके विरूद्ध आवाज नहीं उठा सकता।प्रभुसता के कारण है राज्य अपने नागरिकों ओर अन्य संस्थाओं पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।प्रभूसाता दो प्रकार की होती है -
१) आंतरिक प्रभूसत्ता।
२) बाहरी प्रभूसत्ता।

१) आंतरिक प्रभूसत्ता(Internal Sovereignty)- आंतरिक प्रभूसत्ता। का अर्थ है कि राज्य का अपने देश के अंदर रहने वाले व्यक्तियो,संस्थाओं तथा समुदाय पर पूर्ण अधिकार है।राज्य के के अंदर कोई ऐसा व्यक्ति अथवा संस्था नहीं होनी चाहिए जो राज्य की आज्ञा का उलंघन वैधानिक रूप से करे। यदि कोई व्यक्ति या संस्था ऐसा करता है तो उसे राज्य दंड देता है। कुछ लोग मानते है की संघात्मक सरकार में आंतरिक प्रभूसत्ता केंद्र ओर राज्यो में बंटी होती है,परन्तु यह विचारधारा गलत है।संघातमक सरकार में शक्तियां बंटी नहीं होती बल्कि शक्तियो का विभाजन होता है।

२)बाहरी  प्रभूसत्ता - बाहरी प्रभूसत्ता का अर्थ यह है कि राज्य के बाहर कोई संस्था या शक्ति नहीं होनी चाहिए जो राज्य को किसी ओर की  आज्ञा का पालन करने पर बाध्य कर सके।राज्य पूर्ण रूप से इंडिपेंडेंट होना चाहिए।यदि किसी देश की नीतियों पर अन्य देश का प्रभाव हो तो इसका अर्थ हुआ कि वह देश राज्य नहीं है।
प्रभूसत्ता राज्य का प्राण है।गेटेल का कथन है कि," प्रभुसत्ता है राज्य का असली तत्व है।राज्य के अंदर इसका अर्थ है कि सभी व्यक्ति तथा संस्था जोकि राज्य में है,वैधानिक रूप से इसके अधिकार में है।राज्य के बाहर इसका अर्थ है कि राज्य किसी अन्य राज्य के अधीन नहीं है।"
उपरोक्त वर्णन के आधार पर हम कह सकते हैं,है कि राज्य कि साथापना के लिए चार तत्व आवश्य है इन चारो में से अगर कोई एक भी तत्व ना हो तो राज्य की स्थापना नहीं की जा सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण तत्व 
आमतौर पर यह प्रश्न उठाया जाता है कि इन चारों तत्वों में राज्य का सब से महत्वपर्ण तत्व को सा है।सभी तत्व अपनी अपनी जगह महत्वूर्ण है। जनसंख्या के बिना राज्य कि कल्पना नहीं की जा सकती है। अगर निश्चित भूमि न हो तो राज्य नहीं बन सकता। सरकार भी राज्य का आवश्यक तत्व है क्युकी सरकार राज्य के कार्यों को चलती है।सरकार के बिना लोग बस एक अनावश्यक भीड़ की तरह होगी।सरकार समाज में शांति एवं व्यवस्था को बनाए रखती है। राज्य का आखरी तत्व प्रभूसत्ता है। हमारे विचार से प्रभूसत्ता ही राज्य का सबसे महत्व पूर्ण तत्व है क्युकी अन्य तीन तत्व तो दूसरे समुदायों में भी मिल सकते है लेकिन प्रभूसात्ता केवल और केवल राज्य में ही मिल सकती है। प्रभुसात्ता ही एक ऐसा तत्व है जो राज्य को समाज से अलग करता है या उसे सर्वश्रेष्ठ  बनता है।

 I hope आप को मेरा यह ब्लॉग जरूर पसंद आया होगा।




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